कृष्णा मैं जानता हूं | short letter for krishna | shayarix 2.0

कृष्णा मैं जानता हूं | short letter for krishna | shayarix 2.0

कृष्णा मैं जानता हूं आप हमेशा की तरह मुस्कुरा रहे होंगे लेकिन यहां मेरी मुस्कुराहट मुझ से छिन गयी है । आपका जन्मदिन आ गया है । हर तरफ लोग आपको ही याद

कृष्णा मैं जानता हूं आप हमेशा की तरह मुस्कुरा रहे होंगे लेकिन यहां मेरी मुस्कुराहट मुझ से छिन गयी है । आपका जन्मदिन आ गया है । हर तरफ लोग आपको ही याद कर रहे हैं । कोई आपकी बाल लीलाएं सुना रहा है तो कोई आपके और राधा की प्रेम लीलाओं की कथा सुन रहा है । हमने तो हमेशा ये प्रेम का मतलब ही राधा और कृष्ण माना है । आपके बिना तो प्रेम की कल्पना करना संभव ही नहीं । कितना प्रेम था आपमें ना ? मां के लिए बाबा के लिए गोकुल वासियों के लिए गोपियों के लिए यहां तक कि अपने शत्रुओं के लिए भी । प्रेम के बल ने आपको नन्हें बालक से सबका ईश्वर बना दिया । ये प्रेम ही था जिसके बल पर लोग पहचान पाए कि आप कोई साधारण बालक नहीं बल्कि भगवान विष्णु के अवतार हैं ।

आज भी आपकी प्रेम लीलाओं को याद कर लोग भावविभोर हो जाते हैं लेकिन दिक्कत क्या है कृष्णा जानते हैं ? दिक्कत ये है कि इन लोगों के लिए प्रेम केवल आप और आपकी लीलाओं तक ही सीमित है । उसके बाद इन्हें प्रेम दिखता ही नहीं । ये लोग आज भी आपके और राधा के ना मिल पाने का दुख तो मनाते हैं लेकिन किसी प्रेम करने वाले को एक नहीं होने देते । मैं उससे और वो मुझसे बहुत प्यार करती थी कृष्णा । लेकिन इस समाज ने इन लोगों ने हमें एक नहीं होने दिया । हमें अलग कर के खुद उत्सव मनाया कृष्णा । कितना अजीब है ना , प्रेम के ईश का जन्मदिन मनाने वाले ये लोग किसी की जुदाई पर ठहाके लगा कर हंसते हैं ।

इनकी वजह से ही आज दो हंसते खेलते लोग ज़िंदा लाश बन गये । आपसे भी तो कितनी बार मांगा उसे मैंने। आप तो प्रेम को समझते हैं या ऐसा कहूं कि प्रेम आप ही हैं फिर क्यों नहीं आपने मेरी मदद की कृष्णा । क्यों मेरी ज़िंदगी मुझसे छीन कर मुझे जीने की सज़ा दे दी ? आप ने ही कहा था, कृष्ण सिर्फ उसकी मदद करता है जो खुद की मदद करता है, बताइए कि फिर हमने कौन सी कसर छोड़ी थी, अपने प्रेम के लिए मार खाई, हमें अपमानित किया, कृष्ण वो मेरे लिए कोसी गयी.. रोई.

कृष्णा भला क्यों नहीं कोई हमारे दर्द को समझ पाया ? आप क्यों नही समझ पाए ? आप ईश्वर हैं आपके लिए सहना आसान था, राधा से जुदा होकर भी आप मुस्कुराते रहे लेकिन कृष्णा हम जैसे लोग साधारण इंसान हैं । जीवन में एक बार ही किसी को आत्मा से महसूस कर पाते हैं और चाहते हैं कि उसी के साथ हमेशा रहें । फिर क्यों हमारे अहसासों को समझा नहीं जाता कृष्णा ।

हम जैसों का अंतिम सहारा आप ही हैं। यदि आपने अब भी इस प्रेम और इसकी अहमियत को लोगों के अंदर ज़िंदा ना किया तो आने वाले कल में प्रेम पूरी तरह मर चुका होगा । फिर शायद सुबह अपनी नमी, सूर्य अपनी गुनगुनाहट, पक्षी अपना चहकना, फूल महकना सब भूल जाएंगे । तब फूल नहीं सिर्फ कांटे ही खिलेंगे, फल नहीं बल्कि ज़हर ही फलेगा, शायद धरती पर पानी से ज़्यादा तब लहू दिखे । एक बार प्रेम मरा था याद है ना आपको ? हां महाभारत के समय, वही समय जब भाई पर भाई टूटा था, जब सच और झूठ दोनों एक ही मैदान में खड़े खून से सने थे । तब प्रेम जीवित होता तो शायद कुरुक्षेत्र रक्त से लाल ना होता । लेकिन तब आप थे तभी कुछ अवशेश बच भी पाए लेकिन इस बार प्रेम मरा तो शायद ऐसा प्रलय आए कि लाशों को लाशें ही कंधा दें ।

बचा लीजिए कृष्णा, प्रेम को जीवित कर दीजिए । हम जैसों के लिए ना सही कम से कम अपनी इस धरती के लिए ही सही । बचा लीजिए कृष्णा ।

आपका अपना

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